काश अगर मैं वो शायर होता,
जो लिखता शायद हो सकता।
तेरी हथेली पे अपना नाम लिखता,
मेरे हाथो में तेरा हाथ लिखता।
फिज़ा में कुछ बहारें लिखता,
उनमें तेरा मेरा साथ लिखता।
उन फूलों को तेरे नाम लिखता,
उनके खुशबूओ को तेरा साथ लिखता।
कुछ सागर किनारे लिखता,
उनके रेत पे मैं तेरा नाम लिखता।
लहरों के संगीत में तुझे लिखता,
सांझ के रंगों में तस्वीर लिखता।
तेरी आंखों में खोना लिखता,
बाहों को तेरा एहसास लिखता।
तेरे सजने को अपना ख्वाब लिखता,
तेरे दिल को अपनी धड़कन लिखता।
काश अगर मैं वो शायर होता,
जो लिखता शायद हो सकता।
मेरी ना होती तो कहर लिखता,
मेरी किस्मत में बस तुमको लिखता।
--- सुमित जेजुरीकर