Tuesday, 14 May 2019

सितारा

वो रात का एक सितारा हैं।
उस चांद से दूर ही सही अपने आप का रोशन उजाला है।
धुंधला पर बहुत प्यारा है।
वो बस एक बंजारा है।

दुनिया की फिकर नहीं खुद में हर दिन गुजारा है।
किसी की जरूरत नहीं उसे वो खुद में जहां सारा है।

आज का डर ना कल की फिकर बस खुले आसमान का पंछी वो।
ना दिन ना रात अपनी धुन का एक गीत है वो।

राह शायद है अलग उसकी मगर उसका खुदका अलग मुकाम है।
तू कौन बताने वाला उसको तेरी क्या बिसाद है।

वो बेहती नदी है उसकी राह बदलना आसान नहीं।
बेह जाएगा मूड जाए तो तेरी कुछ औकात नहीं।

अल्हड़ जवानी हो भले ही उसकी ना समझ सभी के ज्ञानो की।
लेकिन वो तो खरा सोना है प्यारे उसमे कोई खोट नहीं विकारोंकी।

वो खोजें रास्ता चाहे कांटो से गुजरकर जाना हो।
राही की उसको गरज नहीं चाहे अकेले चलते जाना हो।

वो बना लेगी अपने निशान चाहे दुनिया जो भी सोचेगी।
दुनिया की उसको फिकर कहां एक दिन वही उसका रास्ता खोजेगी।

वो ना बिजली वो ना तूफान है ना कोई मझधार है।
वो अपने गति चलेगी तो भी काटे ऐसी एक तलवार है।

तू पूंज उसे ना, ना चाह उसे ना सम्मान कोई देना है।
ध्यान रखो बस अवमान ना हो वरना वो रूप कालीका धरना है।

....सुमित जेजुरीकर

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