वो एक नासमझ पगली,
मैं भी उसके प्यार में पागल।
वो मस्त झोंका हवा का,
मैं भी उसपे झूमता बादल।
मैं सुनाता नगमे अपने ,
वो भी सुनती रहती एकदम।
उसे समझ ना आए तो भी,
वो वाह वाह कहती हरदम।
कही दूर चलो वो कहती,
मैं समझ ना पाया धड़कन।
मैं तो अपनी धुन में खोया,
वो भी मेरे दिन में थी गुम।
बस साथ चले यूंही दोनो,
हाथो में हाथ रखकर।
यूंही रोते हंसते राहोमे,
जिंदगी के यह पल जी कर।
... सुमित जेजुरीकर