Saturday, 15 February 2025

महाकुंभ

मन का कुंभ भरे तू पापी, क्या महाकुंभ में नहाए।

गंगाजी अब मैली होती, फिर साफ कभी ना होए।

जग सारा उमड़ा है तट पर, बस तस्वीर अपनी खिंचवाए।

वापस जाकर बनके पापी, कहे अब १४४ साल कुंभ ना आए।

....सुमित जेजुरीकर 

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