आओ चलो हम इश्क करें, कुछ तुम जियो थोड़ा हम मरे।
थोड़े वादे करदो हमसे तुम, कुछ हम पूरा करे कुछ तोड़ो तुम।
राह में हो कुछ जलते दिए, कभी तुम चलो कभी हम रुके।
चलते चलते कुछ मोड आया, जाने आपका दिल क्यों घबराया।
हमने तो आपको समझाया, फिर भी ना हमपे ऐतबार आया।
कुछ कहे बिना क्यों छोड़ गए, हमसे यू मुंह क्यों मोड़ गए।
हमने भी दिल को समझाया, कभी झूठा कहके फुसलाया।
अब बात मेरी थोड़ी मानो तुम, कभी याद से भी याद न आना तुम।
अब दिन बदले राते बदली, कुछ धूप बदली कुछ छांव बदली।
रात भर उनकी याद आती रही, हमको यूं बेकरार करती रही।
हमने फिरसे ठाना है, के तुमको याद न करना है।
न सोते सोते जागना है,न मरते मरते जीना है।
वह रात को दिन न करना है, ना आंख के ताल भरना है।
न जाने फिर भी क्यों याद आए, हम सांसे लेना भूल गए।
सुकून अब बस ये रहे, कुछ तुम जीयो थोड़ा हम मरे।
©सुमित जेजुरीकर
👌
ReplyDeleteThank you
ReplyDeleteमस्तच 👌
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