कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
जब बालों को सहलाती हो जो हलके से,
तो हवा को अपनी जगह है बताती ।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
रुख मोड़ देती है वह अपनी ,
क्योंकि नाराज तो शायद तुम्हें नहीं करना चाहती।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
आंखे जो तुम्हारी कोनेमे जो है ठहरती,
नजर के तीर बनाके है छोड़ती।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
आंचल यह तुम्हारा यूहीं नहीं ठहरता ,
नदी को मोड़ना सिखादे बस यही वो दिखाता।
क्योंकि नजारा वह तुम्हारा यूहीं नहीं होता।
कमर ये तुम्हारी यूहीं नहीं बलखाती,
समंदर में लहेरे और तूफान वो उठाती।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
कदम यह तुम्हारे यूहीं नहीं मुड़ते,
अनजाने रस्तोंको वोह मंजिलें है बताते।
क्योंकि आशिक़ तुम्हारे यूहीं नहीं चले आते।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
:::सुमित
जब बालों को सहलाती हो जो हलके से,
तो हवा को अपनी जगह है बताती ।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
रुख मोड़ देती है वह अपनी ,
क्योंकि नाराज तो शायद तुम्हें नहीं करना चाहती।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
आंखे जो तुम्हारी कोनेमे जो है ठहरती,
नजर के तीर बनाके है छोड़ती।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
आंचल यह तुम्हारा यूहीं नहीं ठहरता ,
नदी को मोड़ना सिखादे बस यही वो दिखाता।
क्योंकि नजारा वह तुम्हारा यूहीं नहीं होता।
कमर ये तुम्हारी यूहीं नहीं बलखाती,
समंदर में लहेरे और तूफान वो उठाती।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
कदम यह तुम्हारे यूहीं नहीं मुड़ते,
अनजाने रस्तोंको वोह मंजिलें है बताते।
क्योंकि आशिक़ तुम्हारे यूहीं नहीं चले आते।
क्योंकि कोई भी अदा तुम्हारी यूहीं नहीं होती।
:::सुमित
Nice dude... Touched..
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