Saturday, 29 June 2019

"वाह"

दोस्त कहता है "बहोत लिखता है तू अपने टूटे दिल के नगमे, कभी कुछ और दूसरा अच्छा भी लिखा कर"।

मैंने कहा "ये लोग ना बड़े नासाज होते है। दूसरों का गम देख कर बहोत खुश होते है"।

उसने कहा "दिल उनका भी टूटा होगा कभी ना कभी कमिने, तभी तो तेरे नगमे सुनकर "वाह" किया करते है"।

... सुमित जेजुरीकर

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